योजना कुछ घंटों को समेटती है, लेकिन जांच महीनों तक चलती है
आपने शायद ध्यान दिया होगा: बड़ी चोरियों की कहानियों में सबसे ज्यादा जगह तकनीक को मिलती है - अलार्म को कैसे चकमा दिया गया, दरवाजा खोलने के लिए क्या इस्तेमाल हुआ। अगर यूं ही पूछा जाए कि ऐसे मामले कहां जाकर बिखरते हैं, तो पहला जवाब लगभग हमेशा तिजोरी के अंदर की गलती होता है।
आपके हिसाब से अपराधियों का भेद सबसे ज्यादा किससे खुलता है?
लेकिन चोरी सिर्फ वे कुछ घंटे नहीं होती। उससे पहले के हफ्ते होते हैं: कोई गोदाम किराये पर लेता है, कोई वैन लेता है, कोई एक महीने तक उस जगह के पास से गुजरता रहता है। उसके बाद के दिन होते हैं: सामान कहीं रखना होता है, गाड़ी कहीं छोड़नी होती है, कचरा बाहर ले जाना होता है।
योजना बीच के हिस्से के लिए होती है और उसकी रिहर्सल की जाती है। योजना के किनारों के लिए नहीं। और आदत की रिहर्सल नहीं की जा सकती: दबाव में इंसान अपनी गाड़ी में बैठता है, जानी-पहचानी राह से जाता है, वहीं सोता है जहां हमेशा सोता आया है।
2003 के Antwerp मामले में तिजोरी लगभग बेदाग तरीके से खोली गई थी, लेकिन शहर के बाहर सड़क किनारे पड़े कचरे के थैलों में अहम सबूत मिले: उनमें आधा खाया हुआ सैंडविच भी था, जिससे डीएनए मिला।
एक छोटी-सी बात पूरी कड़ी खोल देती है
छोटी-सी बात शायद ही कभी अपने-आप किसी को पकड़वाती है - वह जांचकर्ताओं को पहला नाम देती है और फिर वे संबंधों की कड़ियां जोड़ते हैं। 2015 के London मामले में चोरों ने तिजोरी की दीवार में बहुत सावधानी से छेद किया था, लेकिन पास के कैमरों में एक गाड़ी दिखाई दे गई; उसके नंबर से मालिक तक पहुंचे और मालिक से बाकी लोगों तक।
कैमरा। असामान्य समय पर पास से गुजरने वाली गाड़ी सूची में शामिल हो जाती है।
मालिक। नंबर ऐसे व्यक्ति तक पहुंचाता है जिसका रात में वहां होने का कोई कारण नहीं था।
दायरा। जांचकर्ता देखते हैं कि उसके संबंध किन लोगों से हैं और उस रात आसपास कौन था।
पुष्टि। निगरानी और रिकॉर्ड वह देते हैं जो छोटी-सी बात नहीं दे सकती: सबूत।
मामले का आकार भी मदद करता है। आम चोरी की रिकॉर्डिंग को एक-एक फ्रेम देखकर कोई नहीं जांचता - इतने लोग उपलब्ध नहीं होते। बड़े मामले में रिकॉर्डिंग की जांच हफ्तों तक चलती है। जो बात सामान्य मामले में नजरअंदाज हो जाती, वही यहां सुराग बन जाती है।
लेकिन लोगों को ढूंढ लेना और सामान वापस पा लेना एक बात नहीं है: पहली तलाशी से बहुत पहले ही सामान अलग-अलग किया, पिघलाया और इधर-उधर पहुंचाया जा सकता है।
London, 2015: लगभग सभी लोग मिल गए, चोरी हुए सामान का करीब एक-तिहाई वापस मिला
इसलिए अंत दोहरा है: सजाएं हुईं, लेकिन चोरी हुए सामान का ज्यादातर हिस्सा कभी नहीं मिला।
- सिर्फ सेंधमारी की रात नहीं, उससे पहले के हफ्तों और बाद के दिनों को भी देखिए।
- पता कीजिए कि क्या किराये पर लिया गया था और किसके नाम पर।
- लोगों के मिल जाने और सामान वापस मिलने को अलग-अलग समझिए।
- तिजोरी के अंदर की बेदागी को पूरी कार्रवाई की बेदागी मत समझिए।
- नाकामी को मूर्खता बताकर मत समझाइए: अक्सर जांचकर्ताओं ने बस बहुत बारीकी से देखा था।
जांचकर्ता चोरी से पहले के हफ्तों और बाद के दिनों को क्यों देखते हैं?
गाड़ी का नंबर जैसी छोटी बात चोरी सुलझाने में कैसे मदद करती है?
स्रोत
- Antwerp, 2003 - जांच सामग्री और Wired की 2009 की रिपोर्ट पर आधारित। London, Hatton Garden, 2015 - अदालती सामग्री और पुलिस की रिपोर्टों पर आधारित
- वापस मिले सामान का हिस्सा अनुमानित है। सर्वेक्षण के प्रतिशत उदाहरण के लिए हैं, मापे गए आंकड़े नहीं।
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