प्रकाश धीमा नहीं होता - "बाहर" की दिशा ही गायब हो जाती है
जानी-पहचानी तस्वीर यह है: पृथ्वी से निकलने के लिए करीब 11 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति चाहिए, और पिंड जितना भारी हो, उतनी ज्यादा गति चाहिए। लगता है कि ब्लैक होल की सीमा बस प्रकाश की गति से ऊपर है - और प्रकाश से तेज कुछ नहीं चलता। जवाब सही है, पर कारण नहीं: प्रकाश न तेज होता है, न कोई दौड़ हारता है।
प्रकाश की गति हमेशा एक-सी रहती है। बदलता है स्वयं अंतरिक्ष-काल: द्रव्यमान उसे मोड़ता है, और प्रकाश-किरण उपलब्ध रास्तों में सबसे सीधे रास्ते पर चलती है - जैसे विमान "सीधा" उड़ता है, लेकिन नक्शे पर उसका रास्ता चाप जैसा दिखता है। सूर्य के पास यह मोड़ बहुत छोटा होता है, लेकिन इसे कई बार मापा गया है।
ब्लैक होल के पास यह मोड़ अपनी सीमा तक पहुँच जाता है। क्षितिज से थोड़ा ऊपर, बिल्कुल ऊपर की ओर भेजी गई किरण अभी निकल सकती है, लेकिन कोण पर भेजी गई किरण ऊपर उठकर मुड़ती है और वापस गिर जाती है। क्षितिज के जितना पास जाएँ, निकलने का यह शंकु उतना ही संकरा होता जाता है; क्षितिज पर वह सिमट जाता है। उसके नीचे ऐसी एक भी दिशा नहीं है जो दूर ले जाए।
और ऊपर नहीं
क्षितिज पर घटना क्षितिज से उठने वाली किरण की ऊंचाई
तो ब्लैक होल की तस्वीरों में चमकता क्या है
2019 में आकाशगंगा M87 में एक अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास की पहली तस्वीर दिखाई गई। ब्लैक होल खुद नहीं चमकता, उसके आसपास की तप्त गैस चमकती है; चमकीले छल्ले का एक हिस्सा उन किरणों का है जो होल के चारों ओर चाप में मुड़ीं और फिर भी हम तक पहुँचीं। बीच का काला धब्बा स्वयं क्षितिज से साफ तौर पर बड़ा है: पास से गुज़रने वाली किरणें भी भीतर की ओर मुड़ जाती हैं।
एक संक्रमण क्षेत्र भी होता है। लगभग सीमा पर उत्सर्जित प्रकाश हम तक पहुँचता तो है, लेकिन खिंचकर: उसकी तरंगदैर्ध्य बढ़ती है और फोटॉन लगातार कम अंतराल पर आते हैं। भीतर गिराया गया टॉर्च बाहर से एकदम नहीं बुझता दिखेगा - वह लाल और धुंधला होता जाएगा, जब तक पूरी तरह गायब न हो जाए।
ब्लैक होल की आम तस्वीर कहाँ टूटती है
अक्सर दिक्कत "खींच लेता है" शब्द से होती है। दूर से ब्लैक होल उतना ही आकर्षित करता है जितना उसी द्रव्यमान का कोई भी पिंड: अगर सूर्य अचानक ब्लैक होल बन जाए, तो ग्रहों की कक्षाएँ नहीं बदलेंगी - बस अँधेरा और ठंड हो जाएगी। असाधारण बात सिर्फ क्षितिज के बिल्कुल पास होती है।
- "गति" शब्द जाँचें: क्षितिज पर प्रकाश उतनी ही तेजी से चलता है जितनी यहाँ।
- "दीवार" शब्द जाँचें: क्षितिज एक सीमा है, सतह नहीं; वहाँ टकराने को कुछ नहीं है।
- "चमकता है" शब्द जाँचें: तस्वीरों में आसपास की गैस चमकती है, क्षितिज के पार से कुछ नहीं आता।
- "खींच लेता है" शब्द जाँचें: दूर से होल उसी द्रव्यमान के तारे जैसा खींचता है।
प्रकाश घटना क्षितिज के पार से बाहर क्यों नहीं निकल सकता?
ब्लैक होल की तस्वीरों में चमकीले छल्ले जैसा क्या दिखता है?
स्रोत
- इस तंत्र का वर्णन सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत में है: श्वार्ज़शिल्ड समाधान (1916) और घटना क्षितिज की अवधारणा। आकाशगंगा M87 में ब्लैक होल के आसपास की पहली तस्वीर Event Horizon Telescope सहयोग ने 2019 में ली थी।
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