तारा कैसे ढहता है
तारा एक संतुलन के सहारे जीवित रहता है: उसके कोर में होने वाली प्रतिक्रियाओं की ऊर्जा बाहर की ओर दबाव डालती है, जबकि उसका अपना गुरुत्वाकर्षण उसे भीतर की ओर खींचता है। जब तक ईंधन रहता है, यह संतुलन बना रहता है। प्रतिक्रियाएँ रुकते ही बाहर की ओर पड़ने वाला दबाव खत्म हो जाता है।
- ईंधन खत्म
- कोर ढहता है
- आवरण छूटता है
- कोर बचता है
अंत में क्या बचेगा, यह उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। हल्के तारों में एक घना, ठंडा होता गोला बचता है। अधिक भारी तारों में ऐसा पिंड बचता है, जो अकल्पनीय घनत्व वाले पदार्थ से बना होता है। और केवल सबसे विशाल तारों में ही ढहना किसी चीज़ से नहीं रुकता।
दूसरे और तीसरे परिणाम के बीच की सीमा बहुत संकरी है और उसे केवल लगभग ही जाना गया है। इसी वजह से इसके आसपास के पिंड दिलचस्प हैं: इनके ज़रिए वैज्ञानिक यह स्पष्ट करते हैं कि पदार्थ अपने ही गुरुत्वाकर्षण का प्रतिरोध करना ठीक कहाँ बंद कर देता है।
विशालकाय पिंडों की पहेली
इस दौरान छूटा हुआ आवरण एक ऐसी चमक के रूप में दिखाई देता है, जिसकी रोशनी पूरी आकाशगंगा जितनी हो सकती है। अक्सर ऐसी ही चमक से पता चलता है कि कहीं कोई तारा ढहा है - पीछे बचा हुआ पिंड खुद कोई प्रकाश नहीं छोड़ता।
यह अंतर बहुत बड़ा है और केवल पदार्थ के जमा होने से इसे समझाना मुश्किल है। पदार्थ का अवशोषण एक सीमा तक ही हो सकता है: भीतर गिरती गैस से निकलने वाला विकिरण उसके पीछे आने वाली गैस को दूर धकेलता है और बढ़ने की गति एक अधिकतम सीमा पर अटक जाती है।
प्रारंभिक ब्रह्मांड के अवलोकनों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया। वहाँ ऐसे विशाल पिंड मिलते हैं, जो शुरुआती सैकड़ों मिलियन वर्षों में ही मौजूद थे। तारकीय आकार से धीरे-धीरे बढ़ने के लिए स्पष्ट रूप से पर्याप्त समय नहीं था।
इससे इनके बीजों को लेकर कई परिकल्पनाएँ सामने आईं: तारे के चरण के बिना विशाल गैस-बादलों का सीधे ढह जाना, घने समूहों में अनेक पिंडों का विलय, और असामान्य रूप से भारी शुरुआती तारों का बनना। इनमें से किसी को भी अब तक अंतिम उत्तर नहीं माना गया है।
विलयों के अवलोकन मददगार हैं। अंतरिक्ष-समय की तरंगों का पता लगाने वाले डिटेक्टरों ने जो संकेत दर्ज किए, उनसे बीच के द्रव्यमान वाले पिंडों का पता चला - ठीक वे आकार, जो पहले लगभग नहीं मिलते थे।
एक तीसरा रास्ता भी है, जिसकी हाल में पुष्टि हुई है: विलय। एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे दो ब्लैक होल आखिरकार एक में मिल जाते हैं, और इस घटना का पता प्रकाश से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष-समय की तरंगों से चलता है।
तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल कैसे बनते हैं?
कौन-सा सवाल अब भी खुला है?
स्रोत
- विशाल तारे के कोर के ढहने पर तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया अच्छी तरह स्थापित है
- प्रारंभिक ब्रह्मांड में पहले से देखे गए अतिविशाल पिंडों की उत्पत्ति अब भी एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती परिकल्पनाओं का विषय है।
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