गिनती कैसे होती है
आधार हैं न्यायालय के रिकॉर्ड: कार्यवाही के ब्यौरे, फ़ैसले और फाँसी देने के खर्चे का हिसाब। जहाँ अभिलेख पूरी तरह सुरक्षित हैं, वहाँ संख्या ठीक-ठीक मालूम है; बाकी क्षेत्रों के लिए बचे हुए रिकॉर्ड के अनुपात से अनुमान लगाया जाता है।
1580-1630
सदियों के हिसाब से फांसी की सजाओं की संख्या: 1580-1630 के आसपास लहर सघन हुई
वक्र मुख्य बात दिखाता है: मुकदमे पूरे मध्ययुग में नहीं चलते रहे, बल्कि 16वीं और 17वीं सदी के मोड़ पर एक छोटे-से दौर में सिमट गए। यह छापेखाने और धार्मिक युद्धों वाला आरंभिक आधुनिक काल था।
इससे प्रचलित तस्वीर उलट जाती है। चरम बिंदु अंधकार युग में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक क्रांति के दौर में आया, और आरोपों की सुनवाई अक्सर सामान्य धर्मनिरपेक्ष अदालतों में होती थी, केवल धार्मिक अदालतों में नहीं।
लाखों की संख्या कहाँ से आई
- 19वीं सदी के लेख90 लाख की संख्या विवाद खड़े करने वाले लेखों में सामने आई और अभिलेखीय प्रमाणों पर आधारित नहीं थी।
- राजनीतिक इस्तेमाल20वीं सदी में अलग-अलग राजनीतिक धड़ों के प्रचार में इन संख्याओं को दोहराया गया, हर धड़े का अपना उद्देश्य था।
- अभिलेखीय शोधदस्तावेज़ों के आधार पर व्यवस्थित गिनती 20वीं सदी के उत्तरार्ध में शुरू हुई और इससे संख्या का स्तर बिल्कुल अलग सामने आया।
तीसरा बिंदु इस अंतर को समझाता है। जब तक दस्तावेज़ों के आधार पर गिनती नहीं हुई थी, हर संख्या सुनी-सुनाई बातों पर टिकी थी। जैसे ही शोधकर्ताओं ने क्षेत्रवार रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए, अनुमान दसियों हज़ार पर आकर मिल गए।
भूगोल भी मायने रखता है। मुकदमे हर जगह एक समान नहीं चले: कुछ इलाकों में संख्या हज़ारों तक पहुँचती है, जबकि पड़ोसी इलाकों में यह इकाई के अंक तक रहती है। यह अंतर मान्यताओं में नहीं, अदालतों की संरचना में था।
आरोप झेलने वालों की संरचना पर भी ध्यान देना चाहिए। उनमें ज़्यादातर महिलाएँ थीं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में पुरुषों की हिस्सेदारी आधे तक पहुँच गई और कुछ जगहों पर उससे भी अधिक थी। प्रचलित तस्वीर हर जगह सही नहीं है।
यह समझना भी उपयोगी है कि बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई संख्याएँ इतनी टिकाऊ क्यों हैं। वे ज़्यादा प्रभावशाली लगती हैं और चर्च, विज्ञान या राज्य, किसी पर भी आरोप लगाने के लिए बेहतर काम आती हैं। दसियों हज़ार की सटीक संख्या अपने आप में भयावह है, लेकिन उसका असर वैसा नहीं होता।
आँकड़ों की गुणवत्ता को भी याद रखना चाहिए। कुछ अभिलेख नष्ट हो चुके हैं, इसलिए उन क्षेत्रों के अनुमान लगभग हैं। इतिहासकार सीमा को लेकर बहस करते हैं, पर कुल संख्या के स्तर को लेकर नहीं: अंतर कुछ गुना का है, सैकड़ों गुना का नहीं।
जादू-टोने के आरोप में कितने लोगों को फाँसी दी गई?
मुकदमों का चरम किस दौर में आया?
स्रोत
- यूरोप में जादू-टोने के आरोप में फाँसी दिए गए लोगों की आधुनिक गणना 15वीं से 18वीं सदी के बीच दसियों हज़ार की है, जिसका चरम लगभग 1580-1630 के दौरान था
- लाखों में प्रचलित संख्याएँ 19वीं सदी के लेखों से आई हैं।
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