विज्ञापनकर्ता ने क्या तरकीब निकाली
अभियान का रचयिता कोई तर्क नहीं, बल्कि एक संकेत ढूँढ़ रहा था, ऐसी चीज़ जिसे लोग खुद महसूस कर सकें और रोज़ देख सकें। उसे यह संकेत दाँतों पर जमी परत में मिला: जीभ फेरो और उस परत को महसूस करो। विज्ञापन लोगों से उस पर ध्यान देने को कहते थे और उसे बदसूरत मुस्कान का कारण बताते थे।
इस विचार का दूसरा हिस्सा था इनाम। टूथपेस्ट में ऐसे पदार्थ मिलाए गए, जो मुँह में हल्की झनझनाहट और ठंडक पैदा करते थे। दाँतों की सफाई पर उनका कोई असर नहीं था, लेकिन उनसे यह एहसास होता था कि दाँत साफ करने की प्रक्रिया काम कर गई है, और उसे दोहराने का मन करता था।
- संकेत: दाँतों पर परत
- क्रिया: दाँत साफ करना
- इनाम: ताज़गी और झनझनाहट
- अगले दिन दोहराना
यह क्रम पूरा था: साफ दिखाई देने वाला संकेत, आसान क्रिया और तुरंत मिलने वाला इनाम। आज इसे टिकाऊ आदत की बुनियाद कहा जाता है। तब यह लोगों ने बिना किसी तय योजना के, बस प्रयोग और अनुभव से खोज लिया था।
तीसरी पट्टी सबसे दिलचस्प है। ताज़गी का एहसास दाँतों को ज़्यादा साफ नहीं करता था, लेकिन उसके बिना यह आदत टिकती नहीं थी: बाद में जब इन पदार्थों के बिना टूथपेस्ट जारी किए गए, तो ग्राहकों ने शिकायत की कि वह उत्पाद काम नहीं करता।
इससे क्या सीख मिलती है
पहली बात: केवल उपयोगिता से आदत नहीं बनती। लोग पहले से जानते थे कि दाँत साफ करना फ़ायदेमंद है, लेकिन इस जानकारी से वे इसे नियमित रूप से दोहराने नहीं लगे। इसके लिए संकेत और नतीजे का तुरंत मिलने वाला एहसास ज़रूरी था।
दूसरी बात: इनाम तुरंत मिलना चाहिए। आज किए गए काम को 20 साल बाद मिलने वाले स्वस्थ दाँतों से आपका दिमाग नहीं जोड़ता, लेकिन मुँह में महसूस होने वाली ठंडक से वह तुरंत जुड़ जाता है।
आज भी यही तरकीब इस्तेमाल होती है। शैम्पू का झाग, कार का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़, चेहरा धोने के बाद त्वचा में खिंचाव का एहसास, ये सब इसलिए जोड़े जाते हैं कि उत्पाद के काम करने का एहसास हो, न कि इसलिए कि वे खुद असली नतीजा पैदा करें।
इतिहास वाले हिस्से को भी थोड़ा स्पष्ट करना ज़रूरी है। यह आदत केवल विज्ञापन के ज़रिए नहीं फैली: सेना की जाँचों से नए भर्ती हुए लोगों के दाँतों की खराब हालत सामने आई और स्कूलों के कार्यक्रमों ने भी भूमिका निभाई। लेकिन इसी अभियान ने इसे घर में रोज़ किए जाने वाले रिवाज़ में बदल दिया।
वह विज्ञापन अभियान किस चीज़ पर आधारित था?
ताज़गी पैदा करने वाले पदार्थों से क्या मिलता था?
स्रोत
- 1920 के दशक का टूथपेस्ट विज्ञापन अभियान संकेत, क्रिया और तुरंत मिलने वाले इनाम के ज़रिए बड़े पैमाने पर आदत बनाने का एक क्लासिक उदाहरण माना जाता है
- ताज़गी का एहसास देने वाले पदार्थों का सफाई पर कोई असर नहीं था।
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